वीडियो: देखिये जब तीन तलाक पर बने कानून को लेकर भिड़ गये मौलना रशीदी..

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वैसे तो तीन तलाक का मुद्दा कई महीनों से गर्म चल रहा है लेकिन अब लोकसभा में मोदी सरकार ने तीन तलाक पर बिल पेश किया तो इसके खिलाफ विचारधारा रखने वालों ने इसका विरोध शुरू कर दिया. टीवी चैनल्स पर इसको लेकर डिबेट भी खूब हो रही है.

आजतक पर एक ऐसी ही डिबेट का हिस्सा बने बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा और मौलाना साजिद रशीदी, जिसमें दोनों के बीच खूब गहमा-गहमी देखने को मिली. हालत यहाँ तक आ गयी कि दोनों के बीच तेज आवाज में बातें होने लगी.

दरअसल केंद्र सरकार ने मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा को लेकर तीन तलाक के खिलाफ कानून का मसौदा तैयार कर लिया है जिसे कैबिनेट में मंजूरी भी मिल गयी है.

ऐसे में इसे इस्लाम के नियम कानूनों में दखल देने की बात करने वाले मौलवियों और मुस्लिम वोट के ठेकेदारों को ये बिल फूटी आँख भी अच्छा नही लग रहा. इस विषय पर बहस के दौरान संबित पात्रा और मौलाना रशीदी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली.

जो वीडियो हम आपको दिखाने जा रहे हैं उसमें मौलाना रशीदी, संबित पात्रा से कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि “मैं आपके पैर पकड़ता हूं..” जिसपर संबित पात्रा अपना पैर दिखाते हुए कहते हैं कि “मेरा पैर यहां है..” माहौल और ख़राब होता इससे पहले रोहित सरदाना ने मौके को संभाल लिया.

वीडियो

तीन तलाक की राजनीति

अजीब है ना! कि एक शब्द को तीन बार बोलकर(तलाक, तलाक, तलाक) एक मुस्लिम मर्द किसी भी महिला से पीछा छुड़ा लेता है और बाद में इस्लाम का हवाला देकर धर्म की बात करता है. इस देश में तीन तलाक ऐसा मुद्दा रहा है कि जिसे वोट बैंक के नजरिये से भी खूब भुनाया गया है.

साल 1978-शाहबानों केस

साल 1978 में शाहबानों केस में मुस्लिम महिलाओं की दुर्दशा का जमकर मजाक उड़ाया गया था. मजाक मुस्लिम महिलाओं का ही नही उड़ा था बल्कि सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी उड़ा था जिसमें शाहबानों को तीन तलाक देने के बाद उनके पति मुहम्मद खान को गुजारा देने को कहा गया था. जिस वक्त शाहबानों को तलाक दिया गया था, उनकी उम्र 62 वर्ष थी, पांच बच्चे भी थे.

लेकिन इसके बाद भी किसी मौलवी ने इस अधर्म को होने से नही रोका और ख़ामोशी की चादर ओढ़कर अपने मर्द होने पर घमंड करते रहे. केस को सात साल बीच चुके थे. कोर्ट ने शाहबानो के हक़ में फैसला सुनाया, जिसका ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने खुलकर और उग्र होकर विरोध किया. 1986 के उस दौर में कांग्रेस की सरकार थी.

माना जाता है कि कांग्रेस को लगा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मुस्लिम वोट बैंक खिसक सकता है. नतीजन कांग्रेस ने बहुमत का फायदा उठाते हुए कैबिनेट में मुस्लिम महिला (तालाक अधिकार सरंक्षण) कानून पास कर दिया और सर्वोच्चतम न्यायालय के फैसले को पलट दिया.

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