घाटी में शुरू हुआ ज़बरदस्त ग़दर, कश्मीर पुलिस ने ही भारतीय सेना के खिलाफ शुरू किया विद्रोह, दंग रह गए लोग..

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हमारी भारतीय सेना के जवानों को कई तरह के दुश्मनों का सामना करना पड़ता है, कभी सीमा पार से आ रहे दुश्मनों से, कभी देश के अंदर पल रहे दुश्मनों से तो कभी पुलिस से. जी हाँ आप भी दंग रह जाएंगे, कश्मीर से आ रही है बेहद हैरान करने वाली खबर यहाँ खुद कश्मीर पुलिस ने भारतीय सेना के खिलाफ विद्रोह छेड़ दिया है.

कश्मीर पुलिस का ट्रैक रिकॉर्ड पहले भी बहुत खराब रहा है, कई पुलिसवाले हथियार समेत भागने या गायब होने की खबर आती रहीं और बाद में वे आतंकी संगठन में शामिल पाए गए हैं. तो कई बार आतंकवादी इन पुलिसवालों से बड़ी आसानी से हथियार छीन कर भाग जाते हैं. अभी तक तो सीएम मुफ़्ती ही सेना के खिलाफ थी आज तो हद पार हो गयी कश्मीर पुलिस ने भी सेना पर ही FIR करवा दी.

J&K पुलिस ने सेना के ही खिलाफ छेड़ा विद्रोह
अभी मिल रही बड़ी खबर अनुसार जम्मू-कश्मीर में एक कॉलेज लेक्चरर की मौत के मामले में पुलिस ने अपनी जांच में भारतीय सेना के 23 जवानों को जिम्मेदार ठहराया है. ये सभी जवान सबसे खतरनाक रेजिमेंट 50 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) से ताल्लुक रखते हैं. कश्मीर पुलिस ने इसी के साथ इन जवानों के खिलाफ केंद्र में मोदी सरकार से केस चलाने की इजाजत मांगी है.

ये सेना को बदनाम करने की बड़ी साज़िश है. आज इन पथरबाज़ों का समर्थन ये पुलिस कर रही है जब यही पत्थरबाज बाढ़, भूकंप में डूब रहे होते हैं तब यही सेना के जवान अपनी जान पार खेलकर सबको बचते हैं और बदले में उन्हें क्या मिलता है सिर्फ पत्थर, पैट्रॉल बम.

कश्मीर में ऊँचे स्तर पर सफाई की ज़रूरत आ गयी है आज, क्यूंकि देखा गया है जब भी कोई आतंकी मारा जाता है ये लोग उसके जनाजे में पाकिस्तान का झंडा ISIS का झंडा लहराते हुए देशविरोधी नारे लगाते हैं.

गौरतलब है कि अगस्त 2016 में सेना की हिरासत में 30 वर्षीय एक लेक्चरर की मौत हो गई थी, जिसके लिए 23 जवानों को जिम्मेदार ठहराया गया था. ये वहीँ सेना के जवान हैं जिन्हे कश्मीर में आतंकवादियों के खात्मे के लिए बुलाया जाता है. ये वही सेना के जवान हैं जो पथरबाज़ों का सामना न कर पाने में असमर्थ पुलिस के बचाव में आते हैं.

अवंतिपुरा एसएसपी मो.जाहिद ने बताया, “दो हफ्ते पहले इस मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने जांच पूरी की थी. अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है। हमें उनके (सेना के लोगों) खिलाफ केस चलाने के लिए ऑर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर्स एक्ट (एएफएसपीए) के तहत मंजूरी चाहिए होगी.

केंद्र में मोदी सरकार हमेशा से सेना के साथ खड़ी है, सेना के साथ कोई अन्याय नहीं होने दिया जाएगा.
इससे पहली अभी सीएम मुफ़्ती ने सेना के मेजर आदित्य के खिलाफ FIR करवाई थी. जिसका केस सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है.

मेजर आदित्य कुमार के पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करने के लिए शुक्रवार (9 मार्च) को राजी हो गया. जम्मू एवं कश्मीर पुलिस ने गोलीबारी की एक घटना में नागरिकों की जान लेने के आरोप में मेजर के खिलाफ FIR दर्ज की थी.

10 गढ़वाल राइफल्स के मेजर कुमार और अन्य सैनिकों पर खुलेआम गोलीबारी करते हुए तीन पत्थरबाजों की मौत हो गयी थी. दरअसल जब 27 जनवरी को शोपियां जिले में गनोवपोरा गांव के पास भीड़ ने सेना के काफिले पर पत्थरबाजी करते हुए हमला किया था. इसके बाद 300 पत्थरबाजों की भीड़ ने सेना के वाहन को घेरकर उसमे आग लगा दी थी और सेना के अफसर को ज़िंदा जलाने जा रहे थे.

जिसके बाद आखिर सेना के जवान ने वही किया जो हर सैनिक को करना चाहिए था. वो अपने साथी अफसर को ज़िंदा जलते और तड़प तड़प के अमरते हुए कैसे देख सकता था और ना ही कायरों की तरह पीठ दिखाकर भाग सकता था. उसने तुरंत हवाई फायरिंग करके अपने साथी अफसर की जान बचायी. लेकिन अफ़सोस इस साहसी कार्य के लिए हमारी सेना को आज अदालत के कटघरे में खड़े हो कर अपनी बेगुनाही साबित करनी पड़ रही है.

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